गांधी के हत्यारों के अनुयायियों के हाथ मे देश, लोकतंत्र व संविधान खतरे में- जवाहर लाल सिंह

 

तीनो कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक रहा मानव शृंखला!- राजू यादव

मानव श्रृंखला में माले – अ. भा. किसान महासभा, आइसा, इनौस, ऐपवा, एक्टू, खेग्राम्स, इंसाफ मंच हुआ शामिल

जिले के हजारों किसान शामिल हुए मानव श्रृंखला में, आरा के स्टेशन, जगदीशपुर में नयकटोला, पीरो के लोहिया चौक से शुरू हुआ श्रृंखला!

रिपोर्ट:-विकास सिंह/आरा:-जन -जन का हाथ, किसान आंदोलन के साथ , तीनो किसान विरोधी कृषि कानून 2020 को वापस लो, एमएसपी को कानूनी दर्जा दो, प्रस्तावित बिजली बिल 2020 को वापस लो, बिहार मे एमपीएमसी एक्ट को पुनर्बहाल करो नारों के साथ भाकपा – माले, राजद, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम सहित महागठबंधन के नेतृत्व में आज महात्मा गांधी के 72वें शहादत दिवस पर उनको शत -शत नमन करते हुए और किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के याद में दो मिनट का मौन रख कर शुरू हुआ विराट मानव श्रृंखला आरा रेलवे स्टेशन परिषर से शुरू हुआ। इस श्रृंखला में जिले के हाजरों किसान, मजदूरों, महिला, बुद्धिजीवी, छात्र – नौजवानों ने एक दूसरे का हाथ थाम मानव श्रृंखला के कड़ी को जोड़ते हुए आगे बढ़ाया। सभी लोग अपनी मांगों के समर्थन में लिखे तख्तियां हाथों में लिए खड़े थे।श्रृंखला में जवाहर लाल सिंह, माले केंद्रीय कमिटी सदस्य व जिला सचिव ने कहा कि आज देश गांधी के हत्यारों के अनुयायियों के हाथ मे चल रहा। जहां पर देश मे लोकतंत्र, संविधान खतरे में आ गया है। आज लोकतंत्र, संविधान प्रदत अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। शिक्षा रोजगार, स्वास्थ्य के लिए लोकतांत्रिक तरीको से आवाज उठा रहे लोगों पर सरकार हमला बोल रही है और मोदी सरकार किसानों के साथ यही कर रही है। अंग्रेजो के जमाने मे भी गांधी ने किसानों के सवाल पर आंदोलन किया था। मानव श्रृंखला को संबोधित करते हुए भाकपा – माले केंद्रीय कमिटी सदस्य व अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय नेता राजू यादव ने कहा कि 26 जनवरी की छिटपुट घटना की आड़ में सरकार किसान आंदोलन को दबाने की कर रही साजिश। छिटपुट घटना को सरकार बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही है और उसका इस्तेमाल आंदोलन को दबाने के लिए कर रही है. यह बेहद निंदनीय है. इसकी सही से जांच होनी चाहिए कि दिल्ली में किसानों के शांतिपूर्ण मार्च के दौरान उपद्रव करने वाले कौन लोग थे. मोदी-योगी राज में आंदोलनों के दमन का एक पैटर्न विकसित हुआ है. पहले आंदोलन को बदनाम करो, फिर दुष्प्रचार चलाओ, झूठे मुकदमे करो और फिर आंदोलनकारियों को जेल में डाल दो. अब इसी पैटर्न पर किसान आंदेालनों को दबाने की योजना बनाई जा रही है।

लेकिन इस बार किसान पीछे नहीं हटने वाले हैं. दमन के बावजूद फिर से आंदोलनों में किसानों की भागीदारी आरंभ हो गई है.उन्होंने कहा कि मोदी सरकार खेती – किसानी और कृषि उपज को अंबानी –अडानी जैसे कॉर्पोरेट के हाथों नीलाम कर देश में कंपनी राज कायम करने के लिए तीन कृषि कानून लाई है। उन्होंने कहा कि यह कानून पीडीएस को पूरी तरह समाप्त कर देगा। आम गरीबों को राशन मिलना बंद हो जाएगा। इस कानून को रद्द करने के लिए देश मे लाखों किसान आंदोलन कर रहें हैं और देश के नागरिक भी उनके पक्ष मे मजबूती से खड़े हैं। कारपोरेट परस्त मोदी सरकार कानून वापस ले वरना कानून वापसी तक यह आंदोलन जारी रहेगा।सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि बिहार कि भाजपा – जदयु सरकार भी कौरपोरेटपरस्त कानून लाने मे पीछे नही है । यहाँ कि सरकार 2006 मे ही एमपीएमसी कानून समाप्त कर दिया है। इससे बिहार के किसान को औनने – पौने दाम पर फसल बेचना पड़ रहा है। जिससे उनको तंगी तबाही बढ़ी है।

अंत मे नेताओं ने मानव शृंखला को सफल बनाने के लिए जनता को धन्यवाद दिया

भाकपा – माले केंद्रीय कमिटी सदस्य व अगिआंव विधायक मनोज मंजिल, माले राज्य कमिटी सदस्य रमेश जी,इंसाफ मंच राज्य सचिव क्यामुद्दीन अंसारी,राजद जिलाध्यक्ष बीरबल यादव,पूर्व विधायक अनवर आलम,रामबाबू पासवान,सीपीआइ जिला सचिव ज्योतिष कुमार,प्रमोद यादव,का्ँग्रेस जिलाध्यक्ष त्रिवेणी सिंह,उदय यादव,मदन मोहन सिंह,चंद्रमा पासवान, आइसा राज्य सचिव शब्बीर कुमार, इनौस जिला संयोजक शिवप्रकाश रंजन, माले जिला कमिटी सदस्य दिलराज प्रीतम, रघुवर पासवान,पप्पू राम,गोपाल प्रसाद,बालमुकुंद चौधरी,परशुराम सिंह,चंदन कुमार,रामानुज जी,अजय गांधी,महेश राम,बिष्णु ठाकुर,जीतन चौधरी,उपेंद्र भारती,निरंजन केशरी,शिवमंगल यादव सत्यदेव कुमार,अमीत बंटी,राजेंद्र यादव,नंदजी,दीनानाथ सिंह,हरिनाथ राम,ललन यादव,


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