जांबाज को नमन:शहीद चंदन का पार्थिव शरीर आज पैतृक गांव ज्ञानपुरा आएगा, गांव में निकलेगी शवयात्रा

शहीद चंदन कुमार का दर्शन के लोग बेताब, शहादत पर गर्व

बीते 4 माह में जगदीशपुर के दो बहादुर जवान ने दिया सर्वोच्च बलिदान

2017 में भारतीय सेना में हुए थे भर्ती, पहली पोस्टिंग लद्दाख

संवाददाता सूरज कुमार राठी/जगदीशपुर

जगदीशपुर।भोजपुर हमेशा से वीरों की धरती है।यहां के लोग अपने मुल्क के लिए हमेशा खून बहाते रहते हैं।पांच फरवरी 2020 को भी श्रीनगर के बारामुला इलाके में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के साथ हुए मुठभेड़ में भोजपुर के देव टोला निवासी रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर राधामोहन सिंह के पुत्र रमेश रंजन शहीद हो गए थे।

पांच फरवरी 2020 को भी श्रीनगर के बारामुला ,रमेश रंजन शहीद हुए थे

आज साढ़े चार माह बाद फिर चीन के सैनिकों के साथ लड़ाई में लद्दाख की गलवान घाटी में एलएसी पर सरहद की हिफाजत के लिए कुर्बान सुपुत्र चंदन पर भोजपुर का नाज है।शहीद चंदन कुमार का पार्थिव शरीर के आने का इंतजार सभी को है।गुरुवार को शाम पटना एयरपोर्ट पर शहीद का शव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। सेना के अधिकारियों के साथ-साथ मौके पर मौजूद सभी नेताओं द्वारा शहीदों को श्रद्धांजली दी गई।उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार की सुबह शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव ज्ञानपुरा पहुंच जाएगा। भोजपुर सहित पूरे क्षेत्र में मातम छाया हुआ है।शहीद के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन को पूरा गांव जवार बेताब है। शहीद का पार्थिव शरीर पहले गांव आएगा जहां अंतिम दर्शन के पश्चात शवयात्रा निकाली जाएगी। सेना के जवानों की मौजूदगी में उनकी राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव में ही गोवर्धन बाबा के पहाड़ के समीप अंत्येष्टि की जाएगी।

शहीद चंदन कुमार

शहीद चंदन कुमार होमगार्ड जवान हृदयानंद सिंह व मां धर्मा देवी के छोटे पुत्र हैं। वर्ष 2017 जनवरी में भारतीय सेना में चंदन भर्ती हुए थे। दानापुर ट्रेनिंग के बाद प्रथम योगदान लद्दाख में दिए थे। बुधवार की दोपहर अचानक मनहूस खबर ने सभी को झकझोर कर रख दिया। परिवार के अन्य सदस्यों जैसे-तैसे संभाल लिया। लेकिन, बूढ़े पिता और मां की हालत काफी खराब थी। ज्ञानपुरा के साथी अन्य गांव के ग्रामीणों ने बताया कि वे काफी नेकदिल थे। बचपन से जोखिम भरे कार्यों में आगे आकर सबकी मदद करना उनकी पहचान थी। जिसके लिए कई बार चंदन की लोगों ने पीठ भी थपथपाई थी।

शादी से पहले देश की सेवा करते चंदन शहीद

चंदन कुमार की इस साल शादी होने वाली थी। शादी का तारीख भी तय हो गया था। लेकिन पहले लॉकडाउन और कोरोना महामारी को लेकर शादी टल गयी। मिट्टी का कर्ज चुकाने के लिए फर्ज ने हमेशा के लिए शादी रोक दी। बताया जाता है कि चंदन की शादी बीते माह मई महीने में होने वाली थी।उसके बाद डेट बढ़ाकर नवंबर या दिसंबर में तय होने वाला था। चंदन आखिरी बार होली से 10 दिन पूर्व अपने पैतृक गांव आया था छुट्टी में,महज कुछ दिन ही रहने के बाद वापस ड्यूटी पर लौट गए।

मातमपुर्सी को पहुंचे भोजपुर डीएम और एसपी

शहीद चंदन के पैतृक गांव
ज्ञानपुरा भोजपुर डीएम रौशन कुशवाहा व एसपी सुशील कुमार के अलावा जगदीशपुर अनुमंडल पदाधिकारी अरुण कुमार, अंचलाधिकारी जयराम प्रसाद, प्रखंड विकास पदाधिकारी कृष्ण मुरारी सहित अन्य वरीय पदाधिकारी शहीद के घर पहुंचे। इस दौरान पदाधिकारियों ने शहीद के अंतिम विदाई की तैयारी करते हुए नजर आए। शहीद के गांव जाने वाले सड़क को मरम्मती कराया गया। ताकि शहीद के शवयात्रा में किसी प्रकार का कोई दिक्कत न हो।

परिवार में है देश भक्ति के जोश व जज्बा,चंदन के तीन भाई भी सेना

ज्ञानपुरा निवासी हृदयानंद सिंह के चार पुत्र है। सभी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। इनमें से सबसे छोटा चंदन थे। चंदन के बड़े भाई देव कुमार सिंह राजस्थान के गंगानगर में पोस्टेड है, दूसरे भाई संजीत सिंह हैदराबाद में और तीसरा भाई गोपाल सिंह हिमाचल के चीन बॉर्डर पर पोस्टेड है। चंदन की चार बहने हैं। सुमित्रा देवी, सुसाता देवी, जोनी देवी और उमा देवी है।जानकारी के मुताबिक सभी का शादी हो चुका है। चंदन शहादत देकर न सिर्फ पिता, गांव और जिला बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किए है।

ग्रामीणों में चीनी सैनिक व सरकार के प्रति आक्रोश

चंदन कुमार के शहीद होने की सूचना से ही ग्रामीणों और आसपास के लोगों में चीनी सेना और सरकार के प्रति आक्रोश देखा गया। लोगों ने इस दौरान कहा कि अब वक्त आ गया है कि सरकार को चीन को सबक सिखाना चाहिए। इसके लिए हमें चीनी सामान का बहिष्कार करना होगा। लोगों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को चीन को दो टूक जवाब देना चाहिए,
उससे एक बार युद्ध कर सबक सिखाना चाहिए।

https://atncitynews.com/burned-the-name-of-the-martyr-in-jagdishpur-said-then-stabbed/

चीन ने धोखेबाजी से सैनिक को मारा

भाजपा पूर्व विधायक संजय टाइगर, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष हकीम प्रसाद भाजपा नेता पहलाद राय शहीद चंदन के गांव ज्ञानपुरा पहुंचे। सभी ने इस दुख की घड़ी में ईश्वर से प्रार्थना करते हुए उनके परिजनों को इस दुख को सहन के लिए शक्ति प्रदान करें। बताया कि चीन ने धोखेबाजी से सैनिकों को मारा है। इसका जवाब दिया जाएगा। अब भारत 1962 वाला नहीं है।यह 2020 का भारत है।

चंदन की शहादत बेकार नहीं जाएगी

परिवार के लोगों के सांत्वना देने पहुंचे पूर्व विधायक सह भाजपा नेता भाई दिनेश ने कहा कि चंदन की शहादत बेकार नहीं जाएगी। सरकार ने गंभीरता से लिया है। हमने एक लाल खो दिया है। लेकिन इतना तय है कि उनकी शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। भाई दिनेश ने शहीद के नाम पर शहीद स्मारक, स्टेडियम, सड़क बनाने की मांग की है।इस दौरान लोकसभा प्रत्याशी राजू यादव भी शहीद के घर पहुंचकर परिजनों से मिलकर दुख की घड़ी में शामिल हुए। कहा कि सरकार को अब कोई ठोस कदम उठाना चाहिए जिससे दुश्मन कि सफाया हो।

सांत्वना देने वालो की लगी रही भीड़

शहीद की गांव ज्ञानपुरा पहुंचकर सांत्वना देने वालो की लगी रही भीड़। बिहार प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष पंकज कुमार मंटु, प्रवक्ता चंद्रदेव कुमार सिंह उपाध्यक्ष कमलेश कुशवाहा राजेश कुमार रंजन नगर अध्यक्ष सुनील कुमार धनंजय कुमार सिंह हरेंद्र कुमार आदि शामिल है।


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