अनुपम खेर ने 53वें इफ्फी के मंच से उड़िया फिल्म प्रतीक्षा के हिंदी रीमेक की घोषणा की जो पिता-पुत्र के रिश्ते के समीकरणों को दिखाती है

 

दिल्ली :- अनुपम पटनायक की फिल्म प्रतीक्षा की निर्माण प्रक्रिया ही अपने आप में एक फिल्म हो सकती है। एक पिता-पुत्र की कहानी लिखने से लेकर, इस फिल्म के शुरुआती दौर में अपने पिता को खो देने तक, फिर फिल्म न बनाने का निर्णय लेने से लेकर आखिरकार अपने परिवार द्वारा इसे बनाने के लिए पुनः राजी किए जाने तक, और अब इफ्फी-2022 में इसके प्रदर्शन तक, इस फिल्म की अपनी ही एक यात्रा रही है।लेखक गौरहरि दास की एक छोटी कहानी से प्रेरित ये फिल्म एक मध्यवर्गीय परिवार के लड़के संजय की कहानी है, जो अपने पिता के सेवानिवृत्त होने से कुछ महीने पहले सरकारी नौकरी की तलाश में है। उसके पिता बिपिन जोर डालते हैं कि वो नौकरी खोजे क्योंकि परिवार पर कर्ज है, और बिपिन को पता चला है कि उन्हें एक लाइलाज बीमारी है। संजय को सरकार की अनुकम्पा नियुक्ति योजना के बारे में पता चलता है जिसमें परिवार के किसी सदस्य को अपने परिवार के मृत सरकारी कर्मचारी की जगह नौकरी मिल जाती है। निराश संजय अपने पिता के मरने का इंतजार करता है और वो देखता है कि उसका दिमाग कितना विचलित हो चुका है। ये फिल्म परिवार के बारे में है, खासकर पिता और पुत्रों के जटिल संबंधों के बारे में।

संजय की भूमिका निभाने वाले दीपनविट दशमोपात्रा ने इफ्फी में उनकी फिल्म प्रदर्शित करने से मिले सम्मान के बारे में बात करते हुए कहा, “यह मेरे लिए एक बड़ा क्षण है क्योंकि मुख्य अभिनेता के रूप में यह मेरी पहली फिल्म है, लेकिन ओडिशा के लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ी बात है क्योंकि उड़िया फिल्म उद्योग पिछले कुछ समय से संघर्ष कर रहा है। निर्देशक अनुपम पटनायक ने उड़िया फिल्म उद्योग के बारे में बात करते हुए कहा, “1999 के चक्रवात से पहले, ओडिशा में 160 सिनेमाघर थे, चक्रवात के बाद ये 100 रह गए, और कोविड के बाद अब केवल 60 बचे है, कैसे एक उद्योग केवल 60 थियेटर्स पर काम करे।”

 

अनुपम पटनायक ने अपने पिता की पहली फिल्म के बारे में भी बताया, जिसने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था, और निर्देशक के रूप में उनकी पहली फिल्म इफ्फी में दिखाई जा रही है। यह उनके लिए एक खास क्षण था और दिवंगत पिता को सम्मान देने का एक तरीका था। निर्देशक और अभिनेता दोनों के लिए, एक बहुत बड़ा क्षण था जब अनुपम खेर ने उनके साथ मंच साझा करते हुए अनायास घोषणा की कि वह प्रतीक्षा को हिंदी में बनाएंगे, जहां वह पिता की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने पटनायक को फिल्म के अधिकारों के लिए एक टोकन साइनिंग अमाउंट दिया। यह फिल्मों का एक स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण क्षण था, यह ठीक है कि यह सब इफ्फी में हुआ, जो एक ऐसा मंच है जो फिल्मों के जादू का उत्सव मनाता है।

 

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