लाॅकडाउन में भात के लिए गड़हनी प्रखंड के गांव टोलों में थाली बजी

संवाददाता कुणाल सिंह/गड़हनी:–गड़हनी प्रखंड के दर्जनों गांव व टोला में भाकपा-माले के ‘लाॅकडाउन में भूख के खिलाफ भात के लिए’ राष्ट्रव्यापी मांग के कार्यक्रम के तहत अनाज से खाली थाली व बर्तन पीटा गया।
गड़हनी के बीचली पट्टी , उत्तर-पट्टी , इस्लामगंज , इमामगंज बर-नीम-गढ़ पर मोहल्लो सहित कुरकुरी , काउप , डेवढ़ी , दुलारपुर , लभुआनी , पड़ड़िया , निर्मल नगर , इचरी , बलिगांव बंगवां आदि दर्जनों गांव टोला मोहल्ला में अनाज से खाली थाली को जनता ने 10 मिनट तक पीटा।
माले केन्द्रीय नेता मनोज मंजिल , राज्य नेता व गड़हनी सचिव नवीन कुमार ,जनकवि निर्मोही , जिला नेता राम छपित राम , अवधेश पासवान , इंद्रदेव राम , भीम पासवान , मुखिया कलावती देवी , इनौस नेता सोनू , धनकिशोर , हरिनारायण , आइसा नेता उज्ज्वल , विशाल
आदि ने भी थाली बजायी।
शाहीन बाग संचालक अमीन भारती , जफर , मंजूर , सिक्का , सामाजिक सेवी असलम तसव्वुर , राजा भोजपुरिया अजमल , ऐपवा नेता सलमा , रीता आदि ने भी थाली बजायी।

मंजिल जी ने इस मौके पर कहा कि
हमारी पार्टी द्वारा आहूत लॉक डाउन में भात के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत आज गरीब बस्तियों में थाली पीटा गया।कई जगह दिन में उपवास भी रखा गया।इस कार्यक्रम के जरिए हम आपके माध्यम से भुखमरी की समस्या के समाधान के लिए मुखातिब हैं।मंजिल ने कहा कि
पिछले तीन हफ़तों से पूरा देश लाॅकडाउन में पूरी तरह से बंद है. रोज दिहाड़ी कमाने वालों की जेबें अब पूरी तरह से खाली हो चुकी हैं. लाॅकडाउन ने हमारे जीवन को ही रोक दिया है. अपनी रोजाना की जरूरतें पूरी पूरी तरह असमर्थ हैं, भोजन तक पूरा नहीं मिल पा रहा।। जो कुछ भी पहले से जमा था, खर्च हो चुका है. थाली अब खाली है, कौन इसे भरेगा? बच्चे भूखे ही सो रहे हैं, कौन उनका पेट भरेगा?

लाॅकडाउन के नाम में मिली भूख हमें मंजूर नहीं. हमारी ही मेहनत के पसीने से पैदा हुए अन्न से देश के भंडार भरे हुए हैं. उस खाद्यान्न को तत्काल गरीबों के बीच बांटा जाय।टैक्सों अरबअन्य शुल्कों के रूप में हमसे लिया गया पैसा आपके पास जमा है. रिजर्व बैंक से भी आपने पैसा निकाल लिया है। उस पैसे को तत्काल हमारी मजदूरी और बाकी बकायों में खर्च करिये।सभी को भोजन की गारंटी करिये, राशन सबको मिले, और मजदूरी औरर सामाजिक सुरक्षा भत्ता सबको दीजिये।

आपने हमसे कहा था कि प्लेटें, बर्तन, भगौने बजाइये. अब ये बर्तन बिल्कुल खाली पड़े हैं. आपने तो अपने मन की बात कर ली. अब हमारे भूखे पेटों की आवाज ध्यान से सुनिए. हमारी थाली भरनी चाहिए, कोई भूखा न रहे. हमें खाना दो, राशन दो, मजदूरी और भत्ते दो. भूखा भारत कोविड-19 से लड़ाई नहीं लड़ सकता. लोगों को खाना दो, भूख से लड़ो, कोरोना वायरस से लड़ो. इसलिए हमने और जनता ने अपनी थालियां बजा कर बहरी मोदी सरकार तक अपनी आवाज पहुंचायी है।
हम
लड़ेंगे, जीतेंगे ।


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