गड़हनी बनास नदी की पुलिया पार करते हैं हथेली पर रखकर अपनी जान

विशाल दीप सिंह/गड़हनी :-  गड़हनी में बनास नदी पर बनी यह पुलिया बरसात में लोगों के लिए खतरनाक बन गई है। लगातार महीनों दिनों से हो रही बारिश के चलते नदी उफन पर आ गई है । पुलिया पानी में डूब जाती है। इस पर करीब दो फुट ऊपर पानी बहने लगता है, जिससे लोगों का आना-जाना बंद-सा हो जाता है। पानी का बहाव इस कदर होता है कि कुछ दूरी में रेलिंग को छोड़ पुलिया का कोई भी हिस्सा दिखाई नहीं दे देता है। फिर भी लोग बिना रेलिंग के अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जान जोखिम में डाल इसी पुलिया के सहारे नदी पार करते हैं। पुलिया ऐसी है कि अगर किसी का संतुलन बिगड़ जाए तो वो सीधे नदी में जा गिरेगा। यहां के ग्रामीण अक्सर जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते रहते हैं कि पुलिया को चौड़ा कर ऊंचा किया जाये, लेकिन इस ओर लगातार उदासीनता बरती जा रही है। इस पुलिया से रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है।
पुलिया की रेलिंग बनी पर चौड़ाई व ऊंचाई नहीं बढ़ि।
गड़हनी गांव को जोड़ने वाली यह पुलिया नया बाजार सब्जी मंडी के समीप बनास नदी पर बनी है। वहां से सीधे गड़हनी पुरानी बाजार, शिव मंदिर, तीनघवा, सिहार और बरघारा आसानी से पहुंचा जा सकता है, जहां आज जाना खतरों से खाली नहीं है। पुलिया का ऊपरी हिस्सा और रेलिंग पिछले कई वर्षों से पूरी तरह ध्वस्त थी। बताते हैं कि कुछ ग्रामीणों ने रेलिंग तोड़ भी दी थी। पुलिया पर रेलिंग नहीं होने के चलते अक्सर हादसा होते रहता था। चाहे गर्मी का मौसम हो या फिर बरसात का। महज कुछ ही दिन पहले सांसद निधि से रेलिंग लगाई गई, लेकिन पुलिया को ऊंचा या चौड़ा करने पर न तो जनप्रतिनिधि का ध्यान है और न प्रशासन का।

ग्रामीणों व कारोबारियों का दर्द

गड़हनी के व्यवसायी नया बाजार में अपनी दुकान चलाते हैं और इसी पुलिया से आना-जाना करते हैं। अभी जान जोखिम में डाल जाना पड़ रहा है। उपेंद्र केशरी का कहना है कि स्कूली बच्चों और कोचिंग संस्थान में पढ़ने वाली छात्राएं इसी पुलिया से आती-जाती हैं। उनके अलावा डर-डर कर छोटे छोटे बच्चे इस पुलिया को पार करते हैं। मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति भी इसी पुलिया से आना-जाना करते हैं। इस पुलिया से अब तक कई लोग गिर कर अपनी जान गंवा चुके हैं। इस पुलिया से रोजाना एक-दो साइकल सवार भी गिरते रहते हैं। गड़हनी के पंचायत समिति आनंद सिंह उर्फ छोटन सिंह ने कहा कि पिछले कई सालों से इस पुलिया की दुर्दशा ऐसी है। पहले पुलिया की रेलिंग टूट जाने से प्रत्येक वर्ष कई लोग नदी में गिर जाते थे।


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