पूल टेस्टिंग के माध्यम से कोरोना जांच की लक्ष्य प्राप्त करने की तैयारी

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने भेजा पत्र, घनी और ग्रामीण इलाकों में पूल टेस्टिंग के जरिये होगी जांच

बक्सर. कोरोना से संक्रमित लोगों की पहचान के लिये वृहद् स्तर पर जांच की तैयारी की जा रही है। इसके लिये अधिकांश सरकारी अस्पतालों में नई ट्रू नेट मशीन कार्यरत है। इस क्रम में राज्य सरकार की ओर से कोविड जांच की सुविधा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक सुलभ कराने के उद्देश्य से चलंत आरटी-पीसीआर टेस्टिंग वैन का संचालन किया जा रहा है। ताकि, अधिक से अधिक लोगों में कोरोना की जांच की जा सके। वहीं, चलंत आरटी-पीसीआर टेस्टिंग वैन के माध्यम से किये गये जांच कार्य का प्रत्येक दिन अनुश्रवण किया जायेगा। इसके लिये राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने जिलाधिकारी व सिविल सर्जन को पत्र भेजा है। जिसमें उन्होंने जांच की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ट्रू नेट व आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की संख्या को पुनरीक्षित किया है। ताकि टेस्टिंग वैन के लिए निर्धारित दैनिक न्यूनतम जांच लक्ष्य को पूरा किया जा सके। कार्यपालक निदेशक ने जिले को मिले लक्ष्य के अनुरूप कोविड टेस्टिंग कार्य सम्पन्न करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ‘आईसीएमआर’ के निर्देश का अनुशरण करते हुये पूल टेस्टिंग कराने की सलाह दी है।

पूल टेस्टिंग घनी आबादी वाले राज्य के लिए एक अच्छा उपाय
पूल टेस्टिंग में एक ही स्थान के कई लोगों की जांच एक बार में की जाती है है। जिसमें तीन से पांच लोगों के गले और नाक का नमूना लेकर एक साथ ही जांच की जाती है। इसमें से अगर किसी एक का टेस्टा पॉजिटिव आ गया, तो सभी पांचों लोगों का बारी-बारी से टेस्ट किया जाएगा और अगर निगेटिव आया तो सभी को संक्रमण मुक्त करार दिया जाएगा। आईसीएमआर के अनुसार पूल टेस्टिंग घनी आबादी वाले राज्य के लिए एक अच्छा उपाय है। इसमें ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग कम संसाधन और कम समय में की जा सकती है। आईसीएमआर के गाइडलाइंस के बाद हर प्रदेश कोविड19 के लिए पूल टेस्टिंग का सहारा ले रही है, लेकिन इसके इस्तेमाल में कुछ खास बातों का ध्यान रखने की जरूरत है। पूल टेस्टिंग को हॉटस्पॉट क्षेत्रों में इस्तेमाल नहीं किया जाए। पूल टेस्टिंग में पॉलीमर्स चेन रिएक्शन ‘पीसीआर’ टेस्टिंग होती है। जिसमें रीएजेंट होता है, जो टेस्टिंग किट में महंगा होता है। जब एक साथ 3-5 लोगों के टेस्ट हो सकेंगे तो रीएजेंट भी कम लगेगा।
जांच लक्ष्य को किया गया है संशोधित
पत्र में कार्यपालक निदेशक ने बताया, सूबे में अब संक्रमण दर कम होने लगा है। जिसे देखते हुये कोरोना के जांच लक्ष्य में संशोधन किया गया है। साथ ही, आरटी-पीसीआर “रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पॉलीमर्स चेन रिएक्शन” टेस्ट व ट्रू-नेट जांच के लिये अलग-अलग लक्ष्य दिये हैं। जिसके तहत कैमूर जिले में आरटी-पीसीआर जांच के लिये प्रतिदिन 1000 व ट्रू-नेट जांच के लिये प्रतिदिन 125 लोगों का सैंपल लिया जाना है। साथ ही, सैंपलों की जांच के लिये आईजीआईएमसी पटना को टैग किया गया है। जिससे जांच के बाद जल्द से जल्द लोगों को रिपोर्ट सौंपी जा सके। हालांकि, अभी अनलॉक-4 की प्रक्रिया जारी है। लेकिन, लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि कोरोना के सामान्य लक्ष्य दिखने पर तत्काल इसकी जांच करायें और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर चिकित्सकों की सलाह लेते हुये इलाज करायें।


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