मुख्यमंत्री राहत कोष इमोशनली ब्लैकमेलिंग बनकर रह गया है बिहार में – गुड्डू हयात

संवाददाता रितेश हन्नी, सहरसा

सहरसा – कुछ लोग कोरोना जैसी आपदा के समय मुख्यमंत्री राहत कोष में दान को लेकर बड़े ही उत्साही हैं। आपको बता दूँ कि ऐसे दान के मैं सख़्त ख़िलाफ़ हूँ क्योंकि यह सिर्फ़ सरकार के प्रोपगंडा का हिस्सा है। ऐसी दान पेटियों को विपदा से समय खोलकर सिर्फ़ लोगों को इमोशनली ब्लैकमेल किया जाता है। सरकार को ऐसे पैसों की न तो जरुरत होती है और न ही इसका कुछ सदुपयोग होता है। जैसे बिहार के मुख्यमंत्री राहत कोष में पहले ₹25-50 करोड़ होते थे जो अब विपदाओं में लोगों से ले-लेकर ₹800 करोड़ से ज़्यादा हो चुके हैं। लेकिन ख़र्च उसकी तुलना में सिफ़र है। सिर्फ़ दुर्घटनाओं में मृत्यु के मुआवज़े को छोड़ दें तो बड़े ख़र्च के नाम पर बस विभागों में पैसे हस्तांतरित होते हैं जिसका कोई फलाफल शायद ही हो।

2008 की कोसी बाढ़ में ₹200 करोड़ से ज़्यादा जमा किए गए। मुख्यमंत्री ने ‘घोषणा’ की कि 100 जगहों पर पक्के और बड़े-बड़े बाढ़ आश्रय के भवन बनाए जाएँगें। इस बार की तरह ही आपदा विभाग को इसके लिए ₹100 करोड़ रूपये ‘हस्तांतरित’ किए गए। वर्ष 2008 के बाद कितने बाढ़ आश्रय भवन बन गए हैं बताएँगे❓ पिछले साल भी बाढ़ के नाम पर कुछ ₹100 करोड़ से ज़्यादा पैसे दान में मिलने की बात आयी। उन पैसों का क्या हुआ ❓और ये दान पेटी को छोड़िए ये बताएँ कि लोगों के टैक्स के पैसे का क्या होता है ❓ वर्ष 2019-20 का स्वास्थ्य का बजट ₹10,314 करोड़ का था। वो पैसे खर्च हो गए ❓ और हो गए तो सरकारी अस्पतालों में दवाईयाँ, किट, बेड और सफ़ाई क्यों नहीं हैं ❓ सरकार के कामकाज का हिसाब ये है कि अभी-अभी महालेखाकर ने बताया है कि वर्ष 2017-18 में अठारह विभागों के कुल ₹25,197 करोड़ खर्च में ₹19,664 करोड़ अंतिम तिमाही में और ₹18,549 करोड़ तो अंतिम मार्च महीने में खर्च किए गए। सबको पता है कि ये ‘खर्च’ भी कुछ और नहीं एक खाते से दूसरे खाते में बस ट्रान्स्फ़र होते हैं लोगों की भावुकता का फ़ायदा उठाना बंद कीजिए। लोगों ने आपको चुना है, टैक्स के पैसे दिए हैं, प्रोफ़ेशनली काम कीजिए। क़िल्लत पैसे की नहीं, सरकार के नीयत की होती है। और लोगों को भी इन सब जालसाजियों से बचने की ज़रूरत है। अगर बिहार को सच में ‘नो नॉन्सेन्स’ तरीक़े से आगे बढ़ना है चैरिटी करना ही है तो अपने स्तर से कीजिए या किसी ज़िम्मेदार संस्था को दीजिए।


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